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Saturday, 25 July 2026

ब्रजप्रदेश अथवा ब्रजक्षेत्र के संदर्भ में गीत


इस नक्शे में राज्यवार जिलों का वर्गीकरण इस प्रकार है:-

उत्तर प्रदेश (13 जिले): पीलीभीत, बरेली, बदायूं, शाहजहाँपुर, सम्भल, कासगंज, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, फ़िरोज़ाबाद, मैनपुरी, आगरा।

राजस्थान (4 जिले): डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली।

हरियाणा (3 जिले): फरीदाबाद, पलवल, नूँह।

मध्य प्रदेश (4 जिले): श्योंपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर।


A- जय हो जय हो बृज की माटी, जय हो कृष्ण कन्हाई।

मेरौ बृज मेरी संस्कृति, जग में महिमा छाई॥

यमुना मैया की बहती धारा, बंसी की झंकार।

बृजभूमि के कण-कण में, गूँजे राधा-नाम पुकार॥


अंतरा 1 (भूगोल और क्षेत्र):

मथुरा, हाथरस , महावन सोहे, सोहे सुंदर एटा।

 अलीगढ़, कासगंज, और फिरोजाबाद आगरा का पेठा॥

भरतपुर, धौलपुर, ग्वालियर, भिंड-मुरैना का मान।

पलवल, नूह और डीग-भरतपुर, गाएँ बृज का गान॥


अंतरा 2 (संस्कृति और कला):

चरकुला नृत्य की धूम मची है, रसिया की बौछार।

होरी के हुरंगे में भीगे, सारा ही संसार॥

गौ सेवा की पावन परंपरा, संतों का है वास।

छप्पन भोग की महिमा भारी, पूरन होए आस॥


अंतरा 3 में (गौरव और भक्ति):

माखन-मिश्री का भोग लगे, और गूँजे जय-जयकार।

इस माटी की रज जो छू ले, उसका होबे बेड़ा पार॥

संस्कृति अपनी सबसे पावन, गौरव इसका भारी।

शीश झुकाकर नमन करे, ये तो दुनिया सारी॥


समापन:

मेरौ बृज मेरी संस्कृति, जग में महिमा छाई।

जय हो जय हो बृज की माटी, जय हो कृष्ण कन्हाई॥


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B- इस पोस्ट में दी गई जानकारी के आधार पर, चारों राज्यों में फैले सुंदर ब्रज क्षेत्र और वहाँ के प्रसिद्ध उत्पादों की महिमा गाता हुआ एक लोक-गीत नीचे दिया गया है:-


4 राज्यों में फैला देखो, अपना यह ब्रज धाम रे ।

मथुरा इसकी राजधानी, कृष्ण कन्हाई का नाम रे।

कहीं की बर्फी, कहीं के पेड़े, कहीं चूड़ियाँ चमके भारी ।

चलो घुमाएँ तुमको भाई, ब्रज की कुंज डगरिया सारी।

अंतरा 1 -

 मथुरा के पेड़ों का स्वाद अनोखा, धातु शिल्प की माया है ।

आगरा और कासगंज ने तो चमड़े का काम सजाया है।

अलीगढ़ के ताले और हार्डवेयर रक्षक बनते घर के ।

एटा के घुंघरू और घंटी गूंजें सुर सुंदर भर के।

फ़िरोज़ाबाद की काँच की चूड़ी खन-खन खनक दिखाती है ।

हाथरस का हैंडलूम और मैनपुरी की कालीन मन को भाती है ।


अंतरा 2 -( उत्तर प्रदेश की कला)

बदायूँ, बरेली, शाहजहाँपुर की ज़री-ज़रदोज़ी प्यारी ।

बरेली की बर्फी खाकर झूमे दुनिया सारी।

फ़र्रुख़ाबाद की वस्त्र छपाई, पीलीभीत के कपड़े न्यारे ।

गौतमबुद्ध नगर के रेडीमेड गारमेंट लगते सबसे प्यारे।

बुलंदशहर के सिरेमिक बर्तन चमके जैसे तारा ।

संभल का हॉर्न-बोन हस्तशिल्प कला का रूप संवारा।


अंतरा 3 - मध्य प्रदेश और राजस्थान की छटा)


मुरैना की गजक स्वाद में, भिंड की गुजिया मीठी रे ।

ग्वालियर का किला देखकर, आँखें ना होती रीती रे।

श्योपुर में कूनो नेशनल पार्क की रौनक भारी है ।

यह मध्य प्रदेश के ब्रज मंडल की सुंदर तैयारी है।


अंतरा 5 राजस्थान की झलक

डीग के बेर और लाखा तोप, भरतपुर का लोहागढ़ किला ।

घना पक्षी विहार में आकर मन पंछी सा खिला।

धौलपुर का लाल बलुआ पत्थर महलों में मुस्काता है ।

करौली के कैला देवी मंदिर में हर कोई शीश झुकाता है।


अंतरा 5 - हरियाणा की झांकी

फरीदाबाद का तिलप्रस्थ गाँव, कढ़ी-चावल का स्वाद यहाँ ।

पलवल की कपास श्वेत जैसे, ऐसा सुंदर रूप कहाँ।

नूह की अरावली पर्वत श्रेणी खड़ी शीश उठाए है ।

पच्चीस जिलों का यह अनुपम ब्रज सबको हरसाए है।


समीक्षा/समापन-

चारों दिशाओं में फैला देखो, अपना यह ब्रज धाम रे ।

संस्कृति और कला का संगम, सुंदर इसका नाम रे।


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C-🎵 ब्रज चौरासी कोस का रसिया

ओ रसिया! चारों राज्यों में फैल रही ब्रज की आन रे!

मथुरा नगरी राजधानी, कान्हा की पहचान रे!

होई-होई रसिया, होए-होए रसिया!

अंतरा 1:

आगरा और अलीगढ़ का रंग)आगरा, कासगंज का चमड़ा चमके, अलीगढ़ का ताला रे ।

एटा के घुंघरू-घंटी बाजे, चमके चूड़ी वाला रे।


फ़िरोज़ाबाद की काँच की चूड़ी, खन-खन खनके हाथन में ।

हाथरस का हैंडलूम सजे, और कालीन मैनपुरी साथन में।


ओ रसिया! फ़र्रुख़ाबाद की वस्त्र छपाई, पहने गोरी तान रे ।

मथुरा नगरी राजधानी, कान्हा की पहचान रे!

अंतरा 2: (ज़री और मिठास की धूम) 

बरेली की बर्फी खाए के, बदायूँ की ज़री निहारे रे ।शाहजहाँपुर और पीलीभीत के, कपड़े लगते प्यारे रे।


गौतमबुद्ध नगर के गारमेंट, और सिरेमिक बुलंदशहर का ।संभल का हस्तशिल्प अनोखा, नाम बढ़ाए ब्रजघर का!


ओ रसिया! मथुरा के पेड़े खाकर, तृप्त होए सब प्राण रे!मथुरा नगरी राजधानी, कान्हा की पहचान रे!


अंतरा 3: (मध्य प्रदेश और राजस्थान की सैर)


मुरैना की गजक कुरकुरी, भिंड की गुजिया मीठी रे ।

ग्वालियर का किला देख, ग्वालियर की गोरी रीझी रे।


श्योपुर का कूनो पार्क देखो, चीते दौड़ लगावे हैं ।

भरतपुर का लोहागढ़ और डीग के बेर सब खावे हैं!


ओ रसिया! धौलपुर के लाल पत्थर की, महलों में मुस्कान रे!मथुरा नगरी राजधानी, कान्हा की पहचान रे!


अंतरा 4: ( हरियाणा और करौली की महिमा)

करौली की कैला देवी, मैया लाज बचावे है ।

फरीदाबाद का कढ़ी-चावल, खाकर मन हर्षावे है।

पलवल की कपास चमके, जैसे पूनम की रात खड़ी ।

नूह जिले में अरावली की, सुंदर पर्वत-माल खड़ी!

ओ रसिया! पच्चीस जिलों का सुंदर ब्रज, गावे वेदों का ज्ञान रे!

मथुरा नगरी राजधानी, कान्हा की पहचान रे!

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D -⚔️ हुँकार ब्रजमंडल की (वीर रस) ⚔️

मथुरा ब्रज की राजधानी है, कान्हा की हुंकार यहाँ!

चारों राज्यों में फैला देखो, ब्रजवीरों का शौर्य अपार यहाँ!

हम ब्रजवासी वो वीर हठी, जो काल चक्र को मोड़ें रे।

जो आँख उठाए ब्रज की ओर, हम उसका मस्तक फोड़ें रे!

अलीगढ़ के अस्त्र और ताले, बैरी का रस्ता रोकेंगे ।

आगरा और कासगंज के चर्म, ढाल बन छाती ठोकेंगे!

एटा के घुँघरू शांत नहीं, जब बजती रण की घंटी है । फ़िरोज़ाबाद के काँच नहीं, राजपूती तलवार कितनी गर्दन कटी हैं!

हाथरस और मैनपुरी वाले, पीछे पग कभी न धरते हैं ।

फ़र्रुख़ाबाद और पीलीभीत के वीर, सदा रण में ही अड़ते हैं!

बदायूँ, बरेली, शाहजहाँपुर, ज़री के धागे मत समझो ।

ये फंदे हैं यमराज के, तुम इनको ढीला मत समझो!

बुलंदशहर और नोएडा की, युवा शक्ति जब जागती है ।

संभल के तीखे हस्तशिल्प से, बैरी की सेना भागती है!

भिंड-मुरैना का वीर बांकुरा, चंबल का पानी पिया है ।

ग्वालियर के ऊँचे दुर्ग ने, दुश्मनों का खून पिया है!

श्योपुर के कूनो के चीते सी, झपट यहाँ के वीरों की ।

डीग और भरतपुर की माटी, गवाह है तीखे तीरों की!

लोहागढ़ का वो अजय किला, जिसपर गोरे भी हार गए ।

धौलपुर के लाल पत्थरों पर, हम अमिट शौर्य लिख मार गए!

करौली की कैला मैया की, कृपा जिसपर हो जाती है ।

फरीदाबाद की कढ़ी-चावल की ताकत, दुश्मन को रुलाती है!

पलवल और नूह की अरावली, छाती ताने जो खड़ी यहाँ ।

पच्चीस जिलों की यह सेना, रण में भीषण तलवार यहाँ!

सुनो रे दुनिया वालों! यह यमुना की शांत धार नहीं ।

यह सिंहों की वो भूमि है, जिसका कोई सानी पार नहीं!

राधे-राधे की गूँज यहाँ, और बजता रण का नगाड़ा है ।

हम ब्रजवासी वो योद्धा हैं, जिसने यम को भी पछाड़ा है!


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साभार: ओमप्रकाश शर्मा, भरनाकलां (गोवर्धन, मथुरा) 

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